Thursday, September 30, 2010

લજ્જા

" આભુશણ કેટલુ સુંદર છે, આ લજ્જા,
જેટલી વધારે એટલી વધે સુંદરતા..
હું ને તને શું સમજાઉ ઓ મારી પ્રય સખી,
સ્ત્રીઓ થી વધારે કોણ જાણે છે શું લજજા.. "

--પુનમ---
૧૯.૦૧.૦૯

1 comment:

  1. मेरे ब्लाग पर आपका मार्गदर्शन निःसंदेह मुझे आगे भी लिखने की ताकत देता रहेगा ,,,, आपने समय निकाल कर अपनी बहुमूल्य टिप्पणी प्रेषित की ॰॰॰॰॰ आपका बहुत बहुत आभारी हूं ॰॰॰॰॰
    गुजराती में लिखी आपकी रचना बहुत प्रभावशाली है ॰॰॰॰॰ अगर आप अपने ब्लाग पर ट्रांसलेशन की सुविधा बना देंगी तो ब्लाग पढ़ने वाले साथी जिन्हे गुजराती ठीक से पढ़नी नहीं आती है वे भी आपकी रचनाओं का आनन्द ले सकेंगे ॰॰॰॰॰ मार्गदर्शन बनाये रखियेगा ॰॰॰॰॰ शुभकामनायें

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